BUSINESS में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अधिक हैं सक्षम-मधुबाला नागर, Diamond डायरेक्‍टर, ORIFLAME

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Madhubala Nagar

दिल्ली(एनसीआर)महिलाओं के  हितों व उत्‍थान  के  लिए हमेशा से  ही  विभिन्‍न  प्रकार की  योजनाएं बनायी जाती रहीहैं, चाहें वह  सरकार द्वारा हो या फ‍िर समाज द्वारा। पर 21वीं  सदी में महिलाओं को सशक्‍त  बनाने के  मायने बदल  चुके हैं, अब‍ महिलाएं धरती से  आसमान तक अपना बर्चस्‍व लहरा रही हैं। चाहे वह  बिजनिस क्षेत्र हो  या फिर कोई ओर। नारी सशक्तिकरण को लेकर हमने Business Entrepreneur व Oriflame की डायरेक्‍टर मधुबाला नागर से खास बातचीत की और उनकी राय व 20  साल के अनुभव को  जाना।

Women empowerment को  लेकर आपके क्‍या विचार है?

Women empowerment कोई  नई बात  नहीं है सदियों से महिलाएं  बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लिया करती थीं  चाहे घरेलू कार्य हो  या फ‍िर कृषि कार्य। लेकिन एक समय  के बाद  जब  महिलाएं घरेलू कार्यों के  अलावा जॉब  करने लगी और  बिजनिस में  हाथ बॅटाने लगीं तो कहीं, न कहीं घरेलू कार्य में दिक्‍कतें आना शुरु हो गयी और महिलाओं को तरह-तरह की बातें बताकर  उन्‍हें  रोकने की  कोशिश की गयी,लेकिन फ‍िर बढ़ी महंगायी और  घर  की  समस्‍याओं को  देखते हुए  महिलाओं को  आगे  आना  पड़ा । मैं खुद अपने परिवार व अपने आसपास समाज में रहने वाली महिलाओं को  देखती थी और उनसे कुछ न कुछ  सीखती थी। आज महिलाएं डॉक्‍टर हैं साइंटिस्‍ट  हैं, बिजनिसमैन हैं। यहां तक  कि हर  क्षेत्र में महिलाएं आपको  जॉब  करती दिख  जाएंगी। यहीं नहीं महिलाएं तो चॉद तक भी पहुंच चुकी हैं।

हमारे देश में अक्‍सर देखा जाता है कि  भरतीय नारी पुरुषों की तुलना में Business में कम  दिखायी देती हैं। तो  ऐसा क्‍यों? क्‍या यह सही  है?  या फ‍िर गलत  है।

देखिए भारत की अगर  बात करें तो कहा जाता है कि भारत पुरुष प्रधान देश है और शायद यही  कारण है कि  हमारे देश में पुरुष हमेशा से  यह  सोचता है  कि केवल वह ही कार्य कर सकता है, जिसके चलते कुछ  हद तक  महिलाएं घर के कामों में  व अपने परिवार में ही  व्‍यस्‍त  होकर रह जाती है, लेकिन ज‍िन महिलाओं के परिवार वाले शिक्षित हैं  और  उनके रुढ़िवादी विचारों से  मुक्‍त  हैं। वह  महिलाएं अपने परिवार को भी बखूबी संभाल रहीं हैं  बिजनिस में  पुरुषों के मुकाबले अच्‍छा  कार्य कर रहीं हैं और अच्‍छी  पोजीशन पर बैठी हैं। महानगरों की अगर  बात  छोड़ दी जाए तो देश  के  कुछ क्षेत्रों में  रुढिवादी विचार ही  हैं  जो  पुरुषों को  महिलाओं की आजादी पर अंकुश लगाने का कार्य करते हैं और यही एक मुख्‍यत: कारण है कि  महिलाएं पुरुषों के  मुकाबले बिजनिस में  कम दिखायी देती हैं  जो कई  हद तक गलत  है।

सम्‍मान  व उत्‍थान के  लिए हमारी सरकार को 21वीं  सदी में और क्‍या-क्‍या कदम उठाने की  आवश्‍यकता है?

हमारा ऐजूकेशनर सिस्‍टम  बहुत ही  खराब है। सरकार को  एजुकेशन सिस्‍टम  को  बदलने की आवश्‍यकता है। हम वो चीजें पढ़ते हैं  जो  हमारे जीवन में  कभी  काम नहीं आती, लेकिन बाहर के  देशों में  ऐसा  नहीं हैं। वहां प्रक्टिकल चीजे होती हैं जबकि हमारे देश में किताबी चीजें पढ़ाई जाती हैं। जब  बच्‍चों  के एग्‍जाम  होते हैं तो महिलाएं इतने डिप्रेशन में  आ जाती है कि  वह  अपने बच्‍चों  के एक-एक प्रतिशत मार्क्‍स के  लिए  बहुत मेहनत करती हैं जबकि बिजनिस और  जॉब में बच्‍चे अपने हिसाब से परफोर्म करते हैं, जिसका पढ़ाई से कोई  मतलब नहीं होता। तो इस तरह का माहौल बना दिया गया है। जबकि प्रक्टिकल लाईफ अलग ही चल रही होती है। हमें जरुरत है शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की। स्‍कूलों व कॉलेजों में  बच्‍चों  के  भविष्‍य को  लेकर सरकार बदलाव करे और सक्रिय रुप से  कार्य करे तो  महिलाओं का  तो उत्‍थान होना तय  है।

हम देखते हैं कि जब-जब नारी शादी के बंधन में बंध जाती है। तो कभी Family, कभी बच्‍चों को लेकर अपना Business profile stand नहीं रख पाती, तो  ऐसे  में कौन-सा वह रास्‍ता है  कि Family और Business के बीच  सामंजस्‍य  बना  रहे।

हॉ यह तो देखने को मिलता है, लेकिन ऐसा नहीं हैं कि शादी होने पर केवल एक महिला की  जिम्‍मेदारी बढ़ती है पुरुष की भी जिम्‍मेदारियॉ बढ़ जाती है। आज  के समय में तो मैच्‍योर होकर ही सभी शादी करते हैं। ऐसे में थोड़ा और  मैच्‍योर होने की  आवश्‍यकता है और पुरुषों को अपने अहम को दूर करके महिलाओं के अधिकारों का  ध्‍यान रखने की  आवश्‍यकता है। शादी के बाद  केवल एक महिला ही  मॉ  नहीं बनती अपितु एक पुरुष भी बाप  बनता है। दोनों ही एक दूसरे के बीच सामंजस्‍य बनाकर एक दूसरे के  Business profile को stand रख सकते हैं।  

 आज  के  समय  में  Married महिलाओं के लिए Work From Home ही क्‍यों Best Option माना जा रहा है?

ऐसा नहीं है कि महिलाएं केवल Work From Home ही करना चाहती हैं, यह तो कोविड के  दौरान ही हुआ  कि  सभी ने  अपनी जॉब  प्रोफाईल के अनुसार Work From Home किया। लेकिन इस दौरान वह महिलाएं जिनके बच्‍चे हैं, वह काम  भी कर पायीं और अपने परिवार का खयाल भी रख  सकीं । क्‍योंकि आने-जाने का समय बचता है, जिसे आप  अपने परिवार को  दे  सकते हैं। वहीं कम्‍पनीज के  भी ऐसेसरीज इस्‍तेमाल व अन्‍य खर्चे बच  जाते हैं। तो यह आपकी जॉब प्रोफाईल तय करती है कि आप  Work From Home कर  पाएंगी  या  फ‍िर नहीं, लेकिन यदि  महिलाओं को  यह चुनाव करने का  मौका मिलता है तो यकीनन उन्‍हें इसे चुनना चाहिए।

इस दौरान मधुबाला ने  सभी  महिलाओं से  स्‍वंय को सशक्‍त  बनाने की  अपील भी की, और कहा जब एक महिला अंतर मन  से मजबूत होती है, तो वह अपने लिए अपने रास्‍ते  चुनने में सक्षम होती है और वो हर मुकाम पाने में सक्षम होती है जो वह पाना चाहती है।